Ultrasound Therapy से होगा Oral Cancer का इलाज, बिना सर्जरी खत्म हो सकते हैं Cancer Cells- स्टडी में बड़ा दावा

भारत में ओरल कैंसर (मुंह का कैंसर) सबसे आम और गंभीर कैंसरों में गिना जाता है। हर साल बड़ी संख्या में मरीज इस बीमारी से प्रभावित होते हैं। मौजूदा इलाज जैसे सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी कई बार कैंसर के साथ-साथ स्वस्थ ऊतकों को भी नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे मरीजों को लंबे समय तक दर्द, बोलने और खाने में परेशानी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

इसी चुनौती को देखते हुए Indian Institute of Science (IISc) के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक पर शोध किया है, जिसमें Low Frequency Ultrasound की मदद से केवल कैंसर कोशिकाओं को निशाना बनाने की कोशिश की गई। शुरुआती लैब परीक्षणों में इस तकनीक ने काफी सकारात्मक परिणाम दिखाए हैं।

क्यों कमजोर होती हैं Oral Cancer Cells?
शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने पाया कि सामान्य और कैंसर कोशिकाओं की बनावट एक जैसी नहीं होती। स्वस्थ कोशिकाओं के अंदर Tropomyosin 2.1 नाम का एक महत्वपूर्ण प्रोटीन पर्याप्त मात्रा में मौजूद रहता है। यह प्रोटीन कोशिकाओं को बाहरी दबाव और कंपन जैसी परिस्थितियों को सहने की क्षमता देता है। वहीं ओरल कैंसर कोशिकाओं में इस प्रोटीन की मात्रा काफी कम होती है। यही कारण है कि जब इन कोशिकाओं पर कम तीव्रता वाली अल्ट्रासाउंड तरंगें डाली गईं तो वे उस यांत्रिक दबाव को सहन नहीं कर सकीं और उनकी संरचना टूटने लगी। दूसरी ओर स्वस्थ कोशिकाओं पर इसका बहुत कम असर देखा गया। यानी यह तकनीक शरीर की सामान्य कोशिकाओं को बचाते हुए केवल कैंसर कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने की क्षमता रख सकती है।

Tumor की सुरक्षा परत भी हुई कमजोर
किसी भी कैंसर ट्यूमर के आसपास एक मजबूत Extracellular Matrix (ECM) मौजूद रहती है। यह परत कैंसर को सुरक्षा देती है और कई बार दवाओं को ट्यूमर के अंदर तक पहुंचने से रोकती है। यही वजह है कि कई मरीजों में इलाज का असर सीमित रह जाता है।

स्टडी में पाया गया कि Low Frequency Ultrasound इस सुरक्षा परत को भी कमजोर कर सकती है। इससे ट्यूमर की कठोर संरचना ढीली होने लगती है और उसके अंदर दवाओं के पहुंचने की संभावना बढ़ सकती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि भविष्य में इस तकनीक को कीमोथेरेपी के साथ जोड़ा जाए तो दवाएं अधिक प्रभावी ढंग से कैंसर तक पहुंच सकती हैं।

कैंसर फैलने की गति भी हो सकती है कम
अध्ययन के दौरान यह भी देखा गया कि अल्ट्रासाउंड के बाद कैंसर कोशिकाओं की एक जगह से दूसरी जगह फैलने और आसपास के ऊतकों में प्रवेश करने की क्षमता कम हो गई। इसका मतलब यह है कि यह तकनीक केवल कैंसर कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि ट्यूमर के फैलाव को रोकने में भी मददगार साबित हो सकती है।

Patient Samples पर किया गया टेस्ट
इस रिसर्च की खास बात यह रही कि वैज्ञानिकों ने केवल लैब में तैयार सेल लाइनों पर निर्भर रहने के बजाय मरीजों से प्राप्त वास्तविक ट्यूमर सैंपल का उपयोग किया। यह कार्य MS Ramaiah Medical College and Hospitals के डॉक्टरों के सहयोग से किया गया। अलग-अलग मरीजों के नमूनों पर लगभग एक जैसे परिणाम देखने को मिले। अधिकांश मामलों में कैंसर कोशिकाएं अल्ट्रासाउंड के प्रति संवेदनशील रहीं, जबकि स्वस्थ कोशिकाओं को कोई बड़ा नुकसान नहीं पहुंचा। इससे शोध की विश्वसनीयता और भविष्य में इसके क्लिनिकल उपयोग की संभावना मजबूत होती है।

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