केंद्रीय विश्वविद्यालय देहरा में हाल ही में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसका विषय था “विकसित भारत”। इस कार्यक्रम में 250 से अधिक DAV स्कूलों के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण 75 मीटर लंबे कैनवास पर बनाई गई अनोखी कला थी, जिसमें छात्रों ने अपने विचारों और भावनाओं को रंगों के माध्यम से व्यक्त किया।
इस कला प्रदर्शनी का उद्देश्य न केवल छात्रों की रचनात्मकता को उजागर करना था, बल्कि उन्हें सामाजिक और मानवीय मूल्यों के प्रति जागरूक करना भी था। कुलपति प्रो. एस.पी. बंसल ने इस अवसर पर छात्रों को नवाचार और मानवीय मूल्यों की महत्ता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “आज की युवा पीढ़ी को केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए भी प्रेरित करना आवश्यक है।”
कार्यक्रम में छात्रों ने न केवल अपनी कला कौशल का प्रदर्शन किया, बल्कि उन्होंने सामूहिक रूप से एक साथ मिलकर काम करने की भावना को भी प्रदर्शित किया। यह एक ऐसा अवसर था जहां छात्रों ने न केवल अपने व्यक्तिगत कौशल को विकसित किया, बल्कि टीम वर्क की महत्ता भी समझी।
कला के माध्यम से छात्रों ने यह संदेश दिया कि विकास केवल भौतिक संसाधनों में नहीं, बल्कि मानवता और संस्कृति में भी होना चाहिए। इस प्रकार की पहलों से न केवल छात्रों का मानसिक विकास होता है, बल्कि वे अपने आस-पास की दुनिया को समझने में भी सक्षम होते हैं।
केंद्रीय विश्वविद्यालय देहरा का यह कार्यक्रम एक उत्कृष्ट उदाहरण है कि कैसे कला और संस्कृति के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।