यमुनाघाट बैराज परियोजना, जो 1980 के दशक में करोड़ों रुपये की लागत से तैयार की गई थी, अब एक खतरनाक स्थल बन गई है। इस परियोजना ने अब तक 65 से अधिक लोगों की जान ले ली है, जिससे यह स्थान स्थानीय निवासियों और पर्यटकों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। गर्मियों के दौरान, जब लोग नहाने और तैरने के लिए यहां आते हैं, तब उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं होता कि यह स्थान कितना खतरनाक हो सकता है।
बराज के आसपास सुरक्षा इंतजाम पूरी तरह से अनुपस्थित हैं, जिससे स्थानीय लोगों में रोष बढ़ रहा है। लोग बार-बार अधिकारियों से शिकायत कर रहे हैं, लेकिन उनकी आवाज को अनसुना किया जा रहा है। सुरक्षा के बिना, यह बैराज न केवल एक मनोरंजन स्थल, बल्कि एक संभावित मौत का जाल बन गया है।
हिमाचल प्रदेश के मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने इस मुद्दे पर चिंता जताई है और स्थायी समाधान का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार इस समस्या को गंभीरता से ले रही है और जल्द ही सुरक्षा उपायों को लागू किया जाएगा। हालांकि, स्थानीय समुदाय अब भी इस मामले में त्वरित कार्रवाई की मांग कर रहा है।
इस प्रकार, यमुनाघाट बैराज परियोजना एक चेतावनी है कि विकास के साथ सुरक्षा उपायों को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यह आवश्यक है कि प्रशासन इस समस्या का समाधान जल्द से जल्द करे ताकि किसी और की जान न जाए।