शिमला: तकनीकी शिक्षा एवं नगर नियोजन मंत्री राजेश धर्माणी ने हाल ही में एक गंभीर मुद्दे की ओर ध्यान आकर्षित किया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि जीएसटी परिषद द्वारा सीमेंट की दरों को 28 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी करने से हिमाचल प्रदेश को लगभग 1,000 करोड़ रुपए का प्रत्यक्ष नुकसान हुआ है। यह निर्णय न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव डाल रहा है, बल्कि निर्माण उद्योग को भी संकट में डाल रहा है।
हिमाचल प्रदेश, जो कि प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर रहा है, ऐसे में जब निर्माण कार्य की आवश्यकता और बढ़ गई है, यह कमी और भी अधिक चिंताजनक है। मंत्री धर्माणी ने कहा कि इस फैसले से राज्य के विकास कार्यों में बाधा उत्पन्न होगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सीमेंट की कीमत में कमी का सीधा असर निर्माण लागत पर पड़ेगा, जिससे कई परियोजनाएं अधर में लटक सकती हैं।
धर्माणी ने कहा कि राज्य सरकार इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार से उचित कदम उठाने की अपील करेगी। उन्होंने सुझाव दिया कि जीएसटी दरों में इस कमी को पुनः विचार करने की आवश्यकता है, ताकि हिमाचल प्रदेश के विकास को गति मिल सके।
हिमाचल प्रदेश में निर्माण कार्यों के लिए सीमेंट की मांग लगातार बढ़ रही है, और ऐसे में यदि सरकार इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाती है, तो राज्य की विकास दर प्रभावित हो सकती है। स्थानीय निर्माण उद्योग के कई विशेषज्ञ भी इस बदलाव की तीखी आलोचना कर रहे हैं और इसे राज्य के लिए एक बड़ा झटका मानते हैं।
राज्य की अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने के लिए जरूरी है कि उचित नीतियों के माध्यम से इस प्रकार के निर्णयों पर पुनर्विचार किया जाए।