हिमाचल प्रदेश के रोहड़ू उपमंडल की तहसील चिड़गांव में हाल ही में एक 12 वर्षीय बालक की असामयिक मौत ने पूरे क्षेत्र में शोक और चिंता की लहर दौड़ा दी है। इस दुखद घटना पर हिमाचल प्रदेश अनुसूचित जाति आयोग ने गंभीरता से संज्ञान लिया है। आयोग ने पुलिस विभाग को इस मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं, जिसे तीन दिन के भीतर प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, बालक की मौत के कारणों का अभी तक सही से पता नहीं चल पाया है। यह घटना न केवल परिवार के लिए बल्कि पूरे गांव के लिए एक गहरा सदमा है। गांव लिम्बड़ा के निवासी इस घटना को लेकर चिंतित हैं और उन्होंने स्थानीय प्रशासन से इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
इस घटना के बाद से ही गांव में तनाव का माहौल है। कई लोगों ने यह भी सवाल उठाए हैं कि क्या इस मामले में कोई लापरवाही या अनदेखी हुई थी। चिड़गांव का यह मामला अब राज्य के पुलिस विभाग के लिए चुनौती बन गया है, जो इस मामले की गहन जांच करने का वादा कर रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि वे पूरी पारदर्शिता के साथ जांच करेंगे और जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में स्थानीय लोगों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा करना भी महत्वपूर्ण है।
हिमाचल प्रदेश अनुसूचित जाति आयोग की ओर से दिए गए निर्देशों के अनुसार, रिपोर्ट में सभी तथ्यों को शामिल किया जाएगा, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। इस प्रकार की घटनाएं समाज में जागरूकता बढ़ाने और सुरक्षा उपायों के प्रति ध्यान आकर्षित करने की आवश्यकता को दर्शाती हैं।